Tuesday, 29 December 2015

अपना सपना कंही हम छोर आये !

अब कहाँ रहा वो सपना 
जाने कहां हम भूल आये 
अब न रही वो उम्मीद
अपना सपना कंही हम छोर आये  

देखता  रहा सपना उसके आने का 
उसने मौका भी न  दिआ  बताने का
ख़ामोशी थी  उसके चेहरे पर  
उसकी ख़ामोशी में जो राज था 
उसकी तन्हाई का एक और नया साथी था 
बिन कहे हम लौट आये 
अपना सपना कंही हम छोर आये !
By-Rajesh sharma

Monday, 21 December 2015

तेरा साथ

है अगर तू मेरे साथ
तो मुझे डर कहा  लगता हैं
चाहे वो अछा हो मेरे लिए
चाहे वो बुरा हो
तू अगर साथ है
तो सब अछा लगता हैं।
तुझसे मिलता रहूँ हर दिन
हर एक पल तेरे साथ
तू हमेशा खुश रहे
करता रहूँ तुझसे कुछ ऐसी बात
तू रहे मेरे साथ
तोह हर लम्हा अछा लगता हैं
तू अगर साथ हैतेरा साथ
तो सब अछा लगता हैं!
By-Rajesh

Saturday, 19 December 2015

To my love

खुद्किस्मत है वो काजल
जो तेरी आँखों मैं बसता है
आंशुओं के सहारे
जो तेरे साथ साथ चलता हैं
सोचता हूँ कभी काजल मैं होता
साथ मैं तेरे अक्सर होता
आँशु चाहे ख़ुशी या गम के होते
तेरी पलकों के नीचे हमेशा सोता
साथ हो तेरा तो दिल मेरा चलता है
खुद्किस्मत है वो काजल
जो तेरी आँखों मैं बसता है
By-Rajesh sharma