अब कहाँ रहा वो सपना
जाने कहां हम भूल आये
अब न रही वो उम्मीद
अपना सपना कंही हम छोर आये
देखता रहा सपना उसके आने का
उसने मौका भी न दिआ बताने का
ख़ामोशी थी उसके चेहरे पर
उसकी ख़ामोशी में जो राज था
उसकी तन्हाई का एक और नया साथी था
बिन कहे हम लौट आये
अपना सपना कंही हम छोर आये !
By-Rajesh sharma
जाने कहां हम भूल आये
अब न रही वो उम्मीद
अपना सपना कंही हम छोर आये
देखता रहा सपना उसके आने का
उसने मौका भी न दिआ बताने का
ख़ामोशी थी उसके चेहरे पर
उसकी ख़ामोशी में जो राज था
उसकी तन्हाई का एक और नया साथी था
बिन कहे हम लौट आये
अपना सपना कंही हम छोर आये !
By-Rajesh sharma
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